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मतली (Nausea): लक्षण, कारण, इलाज और इससे कैसे निपटें
Table of Contents
- मतली क्या होती है?
- किसे मतली और उल्टी होने का जोखिम ज्यादा होता है?
- मतली के लक्षण
- मतली के कारण
- क्या उल्टी करना नुकसानदायक है?
- मतली और उल्टी का इलाज/घरेलू उपाय
- मतली और उल्टी से होने वाली जटिलताएँ (Complications)
- मतली से बचाव कैसे करें?
- मतली शुरू होते ही उल्टी रोकने के लिए क्या करें?
- कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए?
- निष्कर्ष
- FAQs
मतली क्या होती है?
मतली (Nausea) कोई बीमारी नहीं, बल्कि किसी समस्या या अंदरूनी बीमारी का लक्षण है। पेट में होने वाली वह अजीब-सी बेचैनी, घबराहट या उल्टी जैसा एहसास—जिससे कभी-कभी उल्टी (Vomiting) भी हो जाती है—इसे ही आमतौर पर मतली कहा जाता है।
हममें से लगभग हर किसी ने यह अनुभव किया है—कभी चलती गाड़ी में किताब पढ़ते हुए, कभी समुद्री यात्रा में, या फिर कुछ ऐसा खा लेने पर जो शरीर को सूट नहीं हुआ। वैसे तो यह अक्सर गंभीर नहीं होती, लेकिन यह आपकी रोज़मर्रा की जिंदगी और खाने-पीने की आदतों को काफी प्रभावित कर सकती है।
किसे मतली और उल्टी होने का जोखिम ज्यादा होता है?
कुछ लोगों में मतली और उल्टी होने की संभावना दूसरों की तुलना में ज्यादा होती है। जैसे:
- जिन्हें पहले से मोशन सिकनेस (यात्रा में उल्टी/चक्कर) होती हो
- माइग्रेन का इतिहास हो
- जिन्हें ऑपरेशन के बाद पोस्ट-ऑपरेटिव मतली/उल्टी (PONV) हो चुकी हो
- महिलाओं में—खासकर प्रेग्नेंसी के दौरान
- नॉन-स्मोकर (धूम्रपान न करने वाले) और वे लोग जिनका ऑपरेशन वोलेटाइल एनेस्थेटिक्स या ओपिऑइड्स के साथ हुआ हो
- बच्चों में—उम्र बढ़ने के साथ (शैशवावस्था के बाद) ऑपरेशन के बाद उल्टी का जोखिम बढ़ सकता है
मतली के लक्षण
मतली होने पर अक्सर पेट में मरोड़/घबराहट, बेचैनी और हल्का-सा सिर घूमने जैसा महसूस होता है। सामान्य लक्षण ये हो सकते हैं:
- चक्कर या हल्का सिर घूमना
- कमजोरी
- धुंधला दिखना
- पसीना आना
- मुंह में लार ज्यादा बनना
- उल्टी होने का मन करना
कुछ लोगों को बार-बार या लंबे समय तक रहने वाली (क्रॉनिक) मतली भी होती है। ऐसे में ये शिकायतें हो सकती हैं:
- हर समय उल्टी आने जैसा लगना
- भूख कम लगना
- सूखी उल्टी/उबकाई (Retching)
- पेट में दर्द
- पेट खराब/ऐंठन
- बहुत ज्यादा पसीना आना
- छाती, ऊपरी पेट या गले में अजीब-सी बेचैनी
- उल्टी होना
मतली के कारण
मतली के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन कुछ कारण सबसे ज्यादा आम हैं:
- वायरस/इन्फेक्शन: पेट का वायरल इन्फेक्शन या “स्टमक फ्लू” होने पर मतली आम है।
- मोशन/सी सिकनेस: गाड़ी में सफर या समुद्री यात्रा के दौरान कुछ लोगों को मतली होती है।
- प्रेग्नेंसी की शुरुआत: “मॉर्निंग सिकनेस” प्रेग्नेंसी के शुरुआती लक्षणों में से एक है।
- तेज या अजीब गंध: कुछ लोगों को तेज परफ्यूम, धुआँ या खाना पकने की गंध से माइग्रेन हो सकता है और उससे मतली भी।
- एसिडिटी/GERD: खाने के बाद पेट का एसिड ऊपर चढ़ने से जलन और मतली हो सकती है।
- दवाएँ: कुछ दवाएँ—जैसे कैंसर का इलाज (कीमोथेरेपी)—पेट बिगाड़कर मतली करा सकती हैं।
- खानपान की आदतें: बहुत तैलीय/मसालेदार खाना, ज्यादा गरम-ठंडा साथ में खाना, खाना बार-बार गरम करना, या किसी एलर्जी वाली चीज़ खाना—इनसे भी मतली हो सकती है।
इसके अलावा कुछ अंदरूनी बीमारियों में भी मतली हो सकती है—जैसे पेट में अल्सर, कान का इन्फेक्शन, माइग्रेन, मेनिन्जाइटिस, लिवर की गंभीर बीमारी, आंत में रुकावट, हार्ट अटैक, या BPPV (चक्कर की बीमारी) आदि।
क्या उल्टी करना नुकसानदायक है?
अक्सर उल्टी अपने आप में बहुत नुकसानदायक नहीं होती, लेकिन अगर उल्टी बार-बार हो रही है तो डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी और नमक की कमी) हो सकती है। उल्टी के साथ तरल और इलेक्ट्रोलाइट्स निकल जाते हैं, जिससे कमजोरी, चक्कर, और हालत बिगड़ सकती है।
इसलिए पानी, ORS, नारियल पानी, सूप/यखनी जैसे तरल थोड़ा-थोड़ा करके लेते रहना जरूरी है।
मतली और उल्टी का इलाज/घरेलू उपाय
अच्छी बात यह है कि मतली को अक्सर कुछ आसान आदतों से काफी हद तक संभाला जा सकता है:
- पर्याप्त आराम: कम से कम 7–8 घंटे की नींद और दिन में जरूरत हो तो आराम करें। ज्यादा एक्टिव रहने से मतली बढ़ सकती है।
- पानी की कमी न होने दें: पानी/ORS/नींबू पानी/अदरक वाला पेय जैसी चीजें घूंट-घूंट करके पिएँ। एक साथ बहुत ज्यादा पीने से उल्टी बढ़ सकती है।
- हल्का भोजन: मसालेदार, तला-भुना और भारी खाना फिलहाल टालें। टोस्ट, खिचड़ी, दलिया, केला, सादा दही जैसे विकल्प बेहतर होते हैं।
- तेज गंध से बचें: परफ्यूम, धुआँ, किचन की तेज गंध मतली ट्रिगर कर सकती है।
- मोशन सिकनेस से बचाव: कार में आगे बैठना, ताजी हवा लेना, सिर को स्थिर रखना, खिड़की के बाहर लगातार न देखना मदद कर सकता है। जरूरत पड़े तो OTC दवा डॉक्टर/फार्मासिस्ट की सलाह से लें।
- थोड़ा-थोड़ा करके खाना: दिन में 1–2 भारी मील की जगह छोटे-छोटे मील लें। इससे पेट पर दबाव कम रहता है।
इसके अलावा, बंद कमरा, ज्यादा गर्मी/नमी, तेज रोशनी, स्क्रीन की झिलमिलाहट, और ड्राइविंग जैसी चीजें भी कुछ लोगों में मतली बढ़ाती हैं।
बहुत जरूरी: अगर इन सबके बावजूद 3 दिन से ज्यादा समय तक मतली बनी रहे, या नीचे दिए लक्षण हों, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें:
- हाल ही में सिर में चोट लगी हो
- बहुत तेज सिरदर्द/माइग्रेन
- उल्टी में खून या “कॉफी-ग्राउंड” जैसा पदार्थ
- बहुत ज्यादा कमजोरी
- तेज बुखार
- धुंधला दिखना, भ्रम (confusion), गर्दन अकड़ना
मतली और उल्टी से होने वाली जटिलताएँ (Complications)
अगर मतली/उल्टी को समय रहते संभाला न जाए, तो कुछ समस्याएँ हो सकती हैं:
- डिहाइड्रेशन: चक्कर, कमजोरी, यूरिन कम होना, और गंभीर मामलों में किडनी पर असर
- पोषण की कमी: लगातार खाने-पीने में दिक्कत रहने पर कमजोरी और वजन कम होना
- एसिड रिफ्लक्स बढ़ना: उल्टी से गले/इसोफेगस और दांतों पर असर
- बहुत जोर से उल्टी होने पर दुर्लभ मामलों में इसोफेगस में चोट/फटाव
- प्रेग्नेंसी में बहुत ज्यादा उल्टी (Hyperemesis gravidarum) होने पर माँ और बच्चे—दोनों की निगरानी जरूरी
मतली से बचाव कैसे करें?
निवारण के लिए रोज़मर्रा की छोटी आदतें काफी मदद कर सकती हैं:
- दिन भर पर्याप्त पानी पिएँ
- भारी, तला-भुना, बहुत मसालेदार खाना सीमित करें
- छोटे-छोटे मील लें
- तेज गंध/धुएँ से बचें
- तनाव कम करने के लिए डीप ब्रीदिंग/ध्यान जैसी तकनीकें अपनाएँ
- मोशन सिकनेस हो तो यात्रा से पहले डॉक्टर की सलाह से दवा/उपाय करें
- प्रेग्नेंसी में अदरक, विटामिन B6 आदि का उपयोग डॉक्टर की सलाह से करें
मतली शुरू होते ही उल्टी रोकने के लिए क्या करें?
- धीरे-धीरे गहरी सांस लें, खुद को शांत रखें
- ठंडा/साफ तरल (पानी, नींबू पानी, अदरक वाला पेय) घूंट-घूंट करके लें
- तुरंत भारी खाना न खाएँ—क्रैकर, टोस्ट जैसी हल्की चीजें लें
- आइस चिप्स/पॉप्सिकल से भी राहत मिल सकती है
- ठंडी, शांत जगह पर लेटें और ज्यादा हिलना-डुलना कम करें
अदरक (Ginger) में प्राकृतिक एंटी-नॉज़िया गुण होते हैं, इसलिए अदरक की चाय/लोज़ेंज/कैप्सूल कुछ लोगों में मदद कर सकते हैं। OTC दवाएँ भी उपलब्ध हैं, लेकिन बार-बार मतली होने पर डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए?
अगर मतली/उल्टी 2–3 दिन से ज्यादा बनी रहे, या लगातार बढ़ती जाए, तो डॉक्टर को दिखाएँ। इसके अलावा निम्न स्थितियों में तुरंत चिकित्सा सहायता लें:
- उल्टी में खून या कॉफी-ग्राउंड जैसा पदार्थ
- डिहाइड्रेशन के लक्षण—मुंह सूखना, गहरा यूरिन, चक्कर, तेज धड़कन, भ्रम
- गर्भावस्था में बहुत ज्यादा उल्टी, वजन गिरना, कुछ भी न टिकना
- बच्चों/बुजुर्गों में लगातार उल्टी (डिहाइड्रेशन जल्दी होता है)
- तेज बुखार, तेज पेट दर्द, गर्दन अकड़ना, तेज सिरदर्द, बेहोशी/अस्वस्थता
निष्कर्ष
मतली एक बहुत परेशान करने वाला अनुभव है, जिससे खाने-पीने की आदतें बिगड़ सकती हैं और कमजोरी बढ़ सकती है। अक्सर यह गंभीर नहीं होती, लेकिन अगर लंबे समय तक बनी रहे या बार-बार हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऊपर बताए गए घरेलू उपाय और सावधानियाँ आमतौर पर राहत दे सकती हैं। फिर भी, अगर समस्या बनी रहे, तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
Metropolis Healthcare में आपको अनुभवी पैथोलॉजिस्ट और आधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाएँ मिलती हैं। यहाँ 4000+ टेस्ट/प्रोफाइल उपलब्ध हैं, साथ ही घर पर सैंपल कलेक्शन, सैंपल ट्रैकिंग और ऐप से रिपोर्ट डाउनलोड जैसी सुविधाएँ भी।
FAQs
मैं मतली से जल्दी कैसे राहत पा सकता/सकती हूँ?
- अदरक की चाय/अदरक का सेवन (जितना सूट करे)
- पानी/ORS जैसे तरल घूंट-घूंट करके
- ठंडी, शांत जगह पर आराम
- हल्का भोजन (क्रैकर/टोस्ट/खिचड़ी)
अगर मुझे लगातार मतली रहती है तो क्या करें?
लगातार मतली किसी अंदरूनी समस्या का संकेत हो सकती है। ऐसे में डॉक्टर से जांच कराकर कारण पता करना जरूरी है, ताकि सही इलाज मिल सके।
क्या मतली का मतलब प्रेग्नेंसी या बीमारी ही है?
जरूरी नहीं। मतली प्रेग्नेंसी, इन्फेक्शन, मोशन सिकनेस, दवाओं के साइड इफेक्ट, एसिडिटी, या तनाव—कई वजहों से हो सकती है। सही कारण जानने के लिए डॉक्टर से सलाह लें।
उल्टी जैसा लगता है लेकिन उल्टी होती नहीं—ऐसा क्यों?
यह अक्सर तनाव, चिंता, मोशन सिकनेस, हार्मोनल बदलाव, एसिडिटी या गंध के प्रति संवेदनशीलता के कारण हो सकता है। इसी एहसास को आमतौर पर मतली कहा जाता है।
मतली की सबसे अच्छी दवा कौन-सी है?
दवा कारण पर निर्भर करती है। कुछ OTC विकल्प मिलते हैं, लेकिन बार-बार या तेज मतली में डॉक्टर से सलाह जरूरी है। गंभीर मामलों में डॉक्टर प्रिस्क्रिप्शन दवा (जैसे ondansetron आदि) दे सकते हैं। अपने हिसाब से दवा शुरू करने से बचें।









